Saturday, October 14, 2017

कुदरत कविता लिखता है!

पतझड़ के पत्तों का प्रतिबिम्ब,
पानी में जो दीखता है,
क्या जाने किस कलम से,
कुदरत कविता लिखता है!

राही के राह-राह पर,
लाल-पीले पत्ते बिछा कर,
ऋतुराज, रमणीक रचना रचता है,
क्या जाने किस कलम से,
कुदरत कविता लिखता है!

पतझड़ यूँ तो, बसंत के अनुकूल है,
जहाँ सभी पेड़ विशाल फूल है,
पर पत्ता पथ पर जो गिर गया,
बसंत तक वृक्ष, विरह-वेदना करता है,
क्या जाने किस कलम से,
कुदरत कविता लिखता है!


(c) Rohit Chandra