आपकी चाहत
आपकी चाहत मेरा ख्वाब हो गया,
दिल जो कली था खिल के गुलाब हो गया!
जाने किस राह पे हम दिए चल,
जिंदगी में गया सब बदल -बदल!
आपके बारे में ही सोचूँ हरेक पल,
कभी कोई गीत, कोई शेर, कोई गज़ल!
आपके आने से,
इस प्यासे मन में तालाब हो गया,
आपकी चाहत मेरा ख्वाब हो गया!
सामने जब आप ना होतीं हैं ,
ढूंढती हैं ये निगाहें आपको,
मन में होती हैं आपकी तस्वीर,
वाह मेरी किस्मत, मेरी तकदीर!
आप जो मिले,
नीरस जीवन मद-मस्त हुआ, पानी शराब हो गया,
आपकी चाहत मेरा ख्वाब हो गया!
वाह! आपका सौंदर्य रूप,
जैसे हीरे पे गिरती धुप,
तेज ऐसी जल को जला दे,
वाणी ऐसे की काली को खिला दे!
पूछते थे इश्क क्या होता है,
आपकी आहट से ही जवाब हो गया,
आपकी चाहत मेरा ख्वाब हो गया!
kavi bobby ka ye blog to maine pehle dekha hi nahi..
ReplyDeleteaur ab ye bhi bata de ki is kavi ki kalpana ki source of inspiration kon hai ;-) ie the "aap" in above poem.
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